ताजमहल: सच्ची मुहब्बत या दीवानगी की इंतेहा

आगरा मे स्थित ताज महल की खूबसूरती के विदेशी भी कायल है, कोई विदेश से भारत आये और  ताजमहल न देखे तो बेकार है या कोई भारत मे रहकर भी ताजमहल न देख पाये तो भी बेकार है.

ज्यादातर लोग ये मानते है कि ये सच्चे प्यार की सच्ची निशानी है क्योकि इसे मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी जान से प्यारी बेगम मुमताज महल की याद मे बनवाया था. लोग ताजमहल की  की मिसाले देते है आखिरकार  ये दुनिया के सात   अजूबो मे से एक है लेकिन इससे जुड़ी असली कहानी  बहुत दुखद है.

जैसा कि हम सब जानते है कि शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज के मरने के बाद उसकी कब्र मे ये ताज महल  बनवाया था.इतनी कहानी सुनकर तो सबको अच्छा ही लगेगा पर अन्दर की सच्चाई जानकर उतनी ही हैरानी होगी, दरसअल मुगल बादशाह शाहजहां एक निर्दयी बादशाह था वह अकबर के बेटे जहांगीर (सलीम) का तीसरे नम्बर का बेटा था जिसने अपने बड़े भाइयो के खिलाफ विद्रोह करके तख्त हासिल किया था.  वह जो भी लड़ाई जीतता था वहां की सुन्दर स्त्रियो को जबरन अपनी रखैल बना लेता था. जहां उसकी रखैलो की संख्या गिनी भी नही जा सकती थी वही बेगम सिर्फ  छ: थी.  एक बार एक समारोह पर  अचानक शाहजहां की नजर एक खूबसूरत स्त्री पर टिक गई  और  वह उसका दीवाना होगया, जब शाहजहां ने उस स्त्री के बारे मे पता करवाया तो वह उसके  सूबेदार की पत्नी निकली तब शाहजाह ने उस स्त्री को पाने के लिये साम दाम दन्ड भेद सारे पैतरे अपनाये, सबसे पहले उसने सूबेदार को समझा र उसको अपनी पत्नी को छोड़ने का हुक्म दिया पर उस वफादार सूबेदार ने हाथ जोड़ कर उसके हुक्म को पूरा करने से इनकार कर दिया तब शाहजहां उसे उच्च पद देने और मालामाल करने का लालच दिया पर वह सूबेदार अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करता था इसलिये  शाहजहां द्वारा दिये हुये लालच से भी उसका ईमान नही बदला , अन्तत: शाहजहां ने वही किया जो उसे नही करना चाहिये था उसने उस ईमानदार सूबेदार की हत्या करवा दी.

शाहजहां ने इस बार उसने एक गुलाम की पत्नी को अपनी रखैल नही बनाया क्योकि शाहजहां के मुताबिक वह उससे सच्चा प्यार करता था इसलिये उसने उस स्त्री को अपनी चौथी बेगम बना कर उसका नाम मुमताज रख दिया. इसके बाद  13 बच्चो के जन्म बाद  मुमताज ने शाहजहां के  चौदहवे बच्चे को जन्म देकर दम तोड़ दिय‍ा, वाकई  ये शाहजहां की मुहब्बत थी या शोषण? ये समझ पाना बहुत आसान है.  खैर शाहजहां ने मुमताज की याद मे ताजमहल बनवा डाला पर  पर उसकी आत्मा को शान्ति के बजाय अशान्ति मिली होगी जब शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरो के बड़ी बेरहमी से हाथ कटवा दिये ताकि वे आगे कोई दूसरा ताज महल न बना सके. कितने परिवारो पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा होगा शाहजहां की इस  वासना से भरी हुई  मुहब्बत के चक्कर मे, खैर  मुमताज की मौत के बाद शाहजहां को तो जैसे मुमताज की लत लग गई थी वह  उसे भुला नही पारहा था. वह हर युवती मे मुमताज को ढँढने लगा  अन्तत: उसने मुमताज की कमी को पूरा करने के लिये मुमताज की बहन फरजाना से शादी कर ली पर अभी भी उसे मुमताज की कमी खल रही थी? उसकी की हर हद पार होगई जब अचानक उसका ध्यान मुमताज  और खुद की सबसे बड़ी बेटी बेटी जहांआरा पर गया जो कि बिल्कुल अपनी मां मुमताज जैसी दिखती थी तो उसकी नीयत खराब होगई और उसे अपनी रखैल बना कर हैवानियत का नया राग अलापा जिससे पिता पुत्री का पाक रिश्ता भी कलंकित होगया पर शाहजहां के लिये ये मुमताज के प्रति सिर्फ उसका सच्चा प्यार था. उसे जहांआरा को किसी और पुरुष के साथ देखना भी  कुबूल नही था जो भी उसकी बेटी से शादी का प्रस्ताव रखता तो वह तुरन्त मना कर देता था यहां तक कि जब उसे पता चला कि उसकी बेटी एक लड़के से प्यार करती है तब उसने उसके प्रेमी को बक्से मे बंद करके जिंदा जला दिया.

इस बार जहांआरा खामोश नही बैठी उसने अपने पिता के खिलाफ आवाज उठाई और मौलवियो से मदद मांगी पर कोई भी शाहजहां की खिलाफत करके जान गवांना नही चाहता था इसलिये सबने शाहजहां की इस बेतुकी बात ‘जब माली एक  बगीचे को बना सकता है तो उस बगीचे के पेड़ो के फल खाने का पहला अधिकार भी माली को ही होना चाहिये’ को जायज ठहरा दिया. नापाक मुहब्बत के मारे शाहजहां की उम्र होरही थी पर शौक (वासना)  खत्म नही होरहे थे और सारी प्रजा को इंतजार था कि कोई मसीहा आये और शाहजहां जैसे राक्षस से मुक्ति दिलाये, प्रजा की ये इच्छा एक इंसान ने पूरी की जो शाहजहां का ही बेटा था उसे अपने पिता की क्रिया कलाप बिल्कुल भी पसन्द न थे इसलिये उसने शाहजहां को  एक महल मे कैद कर दिया और  खुद तख्त पर बैठ गया पर हाय रे! प्रजा का दुर्भाग्य इस  इंसान का  नाम औंरंगजेब था जो सबसे क्रूर मुगल बादशाह माना गया.

ताज महल उस खूबसूरत स्त्री की तरह है जिसके ह्रदय मे अपने अतीत से जुड़ी अथाह पीड़ा व्याप्त है फिर भी उसे  इस पीड़ा को दुनिया से छिपा कर सबके सामने मुस्कुरा कर पेश आना पड़ता है. खैर ताज महल को बनवाने वाले मुगल  बादशाह शाहजहां की करतूतो का फल ताजमहल और भारत क्यो भुगते?  ताज महल भारत की सुन्दरता को बढ़ाता है इसलिये ये भारत की शान है और हमेशा रहेगा.

 

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